<p>भारत में पशुपालन न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है बल्कि करोड़ों किसानों की आय का स्थायी स्रोत भी है। सरकार का उद्देश्य है कि पशुपालक केवल दूध या गोबर तक सीमित न रहें, बल्कि वैज्ञानिक तरीकों और सरकारी योजनाओं के माध्यम से अपनी आय को दोगुना कर सकें। नीचे दी गई योजनाएँ केंद्र और राजस्थान सरकार दोनों स्तरों पर संचालित हैं, जो पशुपालकों की आर्थिक स्थिति, पशुधन स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में मदद करती हैं।</p>
<h2>1️⃣ राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM)</h2>
<p><strong>क्या है:</strong> राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission) भारत सरकार की प्रमुख योजना है, जो 2014 में शुरू हुई और 2021 में पुनर्गठित की गई। इसका उद्देश्य पशुधन उत्पादन में विविधता, चारा विकास, उद्यमिता, बकरी-भेड़-मुर्गी पालन को प्रोत्साहन और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाना है।</p>
<p><strong>लाभ:</strong> इस योजना में 50% तक की सब्सिडी दी जाती है। पशुपालक स्वयं-सहायता समूह (SHG), FPO या व्यक्तिगत रूप से पशुधन इकाई स्थापित कर सकते हैं। योजना में बकरी-पालन, सूअर-पालन, पोल्ट्री, फीड-यूनिट, हचरी, मिनी-डेयरी जैसे घटक शामिल हैं।</p>
<p><strong>कैसे आवेदन करें:</strong><br>
- आधिकारिक वेबसाइट <a href="https://nlm.udyamimitra.in/Home/PreApplication" target="_blank">https://nlm.udyamimitra.in</a> पर जाएँ।<br>
- “Pre-Application Form” भरें।<br>
- बैंक/वित्तीय संस्था द्वारा जाँच और स्वीकृति के बाद सब्सिडी स्वीकृत होती है।<br>
- योजना के सभी दस्तावेज़ (आधार, बैंक विवरण, भूमि/लीज पेपर, DPR रिपोर्ट) साथ रखें।</p>
<p><em>टिप:</em> आवेदन से पहले नज़दीकी पशुपालन विभाग या जिला उद्योग केंद्र से परामर्श लेना लाभदायक रहता है।</p>
<h2>2️⃣ डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS)</h2>
<p><strong>क्या है:</strong> यह योजना NABARD के माध्यम से चलाई जाती है। इसका उद्देश्य डेयरी क्षेत्र में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना और आधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित करना है।</p>
<p><strong>लाभ:</strong> पशुपालक को 25% (महिलाओं/SC-ST को 33%) तक की सब्सिडी दी जाती है। योजना में डेयरी फार्मिंग, दूध कूलिंग यूनिट, मिनी डेयरी प्लांट, चारा भंडारण और पशु-वाहन की सुविधा शामिल है।</p>
<p><strong>कैसे आवेदन करें:</strong><br>
- अपनी बैंक शाखा (NABARD से संबद्ध) से संपर्क करें।<br>
- DEDS आवेदन फॉर्म भरकर DPR (परियोजना रिपोर्ट) के साथ जमा करें।<br>
- बैंक द्वारा स्वीकृति के बाद सब्सिडी सीधे खाते में जमा होती है।</p>
<p><em>सुझाव:</em> इस योजना के लिए 2-10 गाय/भैंस तक का फार्म प्रारंभिक चरण के लिए पर्याप्त है।</p>
<h2>3️⃣ पशुधन बीमा योजना</h2>
<p><strong>क्या है:</strong> पशु-मृत्यु या दुर्घटना के समय पशुपालक को आर्थिक सुरक्षा देना इस योजना का उद्देश्य है।</p>
<p><strong>लाभ:</strong> चयनित पशुओं के बीमा पर 50% तक प्रीमियम सब्सिडी राज्य/केंद्र सरकार देती है।</p>
<p><strong>कैसे आवेदन करें:</strong><br>
- नज़दीकी पशुपालन कार्यालय या अधिकृत बीमा कंपनी से संपर्क करें।<br>
- पशु की फोटो, पहचान टैग, बैंक पासबुक व स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जमा करें।<br>
- बीमा पॉलिसी मिलने के बाद क्लेम हेतु मृत्यु के 24 घंटे में सूचना आवश्यक है।</p>
<p><em>टिप:</em> बीमा के साथ टीकाकरण रिकॉर्ड संलग्न करने से क्लेम प्रक्रिया सरल हो जाती है।</p>
<h2>4️⃣ निःशुल्क कृत्रिम गर्भाधान (AI) कार्यक्रम</h2>
<p><strong>क्या है:</strong> पशुधन की नस्ल सुधार हेतु निःशुल्क कृत्रिम गर्भाधान सेवा राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही है। प्रशिक्षित परावैट या पशु चिकित्सक द्वारा यह सेवा ग्राम स्तर पर उपलब्ध है।</p>
<p><strong>लाभ:</strong> सुधरी नस्ल के बछड़े, दूध उत्पादन में वृद्धि और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।</p>
<p><strong>हीट (ऊष्णावस्था) के लक्षण पहचानने के तरीके:</strong></p>
<ul>
<li>गाय या भैंस बार-बार रंभाए और चंचल दिखाई दे।</li>
<li>जननांगों से पारदर्शी स्राव आए।</li>
<li>खाना कम खाए या दूसरों पर चढ़ने जैसी क्रिया करे।</li>
</ul>
<p><strong>कैसे लाभ लें:</strong> अपने नज़दीकी पशु चिकित्सक या 1962 हेल्पलाइन पर संपर्क करें। हीट आने के 12–18 घंटे के भीतर AI करवाना उपयुक्त है।</p>
<h2>5️⃣ राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान (FMD, HS, BQ, Brucellosis, PPR)</h2>
<p><strong>क्या है:</strong> केंद्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित “राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम” (NADCP) के तहत देशभर में निःशुल्क टीकाकरण किया जाता है।</p>
<p><strong>टीकाकरण समय-सारणी:</strong></p>
<ul>
<li>FMD – हर 6 माह में बूस्टर।</li>
<li>HS – वर्ष में एक बार (बरसात से पहले)।</li>
<li>BQ – वर्ष में एक बार।</li>
<li>PPR (भेड़-बकरी) – 3 माह की आयु से एक बार।</li>
</ul>
<p><strong>कैसे करवाएँ:</strong> अपने गाँव के टीकाकरण शिविर या पशु चिकित्सालय से संपर्क करें। पशु की पहचान पर्ची सुरक्षित रखें।</p>
<h2>6️⃣ राजस्थान गोपालन अनुदान योजना</h2>
<p><strong>क्या है:</strong> राजस्थान सरकार द्वारा पंजीकृत गौशालाओं या गोसेवक संस्थाओं को पशु देखभाल व संरचना विकास हेतु वित्तीय सहायता।</p>
<p><strong>लाभ:</strong> चारा, पानी, उपचार और आश्रय की व्यवस्था हेतु प्रति पशु निश्चित राशि दी जाती है।</p>
<p><strong>कैसे आवेदन करें:</strong> संबंधित जिला पशुपालन कार्यालय में प्रस्ताव और पंजीकरण दस्तावेज़ जमा करें।</p>
<h2>7️⃣ पशुधन निःशुल्क आरोग्य योजना</h2>
<p><strong>क्या है:</strong> ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को दवाएँ और उपचार निःशुल्क उपलब्ध कराने की राज्य योजना।</p>
<p><strong>कैसे प्राप्त करें:</strong> नज़दीकी पशु चिकित्सालय में जाकर अपना नाम और पशु विवरण दर्ज कराएँ।</p>
<h2>8️⃣ 1962 मोबाइल पशु सेवा</h2>
<p><strong>क्या है:</strong> पशुपालक के कॉल पर मोबाइल वेटरनरी यूनिट गाँव में पहुँचकर पशु का इलाज करती है।</p>
<p><strong>कैसे लाभ लें:</strong> 1962 पर कॉल करें, पशु की समस्या बताएं, टीम सीधे आपके स्थान पर पहुँचेगी।</p>
<h2>9️⃣ फीड एंड फॉडर डेवलपमेंट योजना</h2>
<p><strong>क्या है:</strong> पशुओं के लिए पौष्टिक चारा उत्पादन और फीड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर सब्सिडी।</p>
<p><strong>कैसे आवेदन करें:</strong> कृषि या पशुपालन विभाग के माध्यम से डीपीआर बनवाकर आवेदन करें। यह योजना केंद्र और राज्य दोनों द्वारा संयुक्त रूप से लागू है।</p>
<h2>🔟 आवेदन प्रक्रिया (स्टेप-बाय-स्टेप)</h2>
<p><strong>ऑनलाइन आवेदन हेतु लिंक:</strong></p>
<ul>
<li>राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM): <a href="https://nlm.udyamimitra.in/Home/PreApplication" target="_blank">https://nlm.udyamimitra.in</a></li>
<li>डेयरी उद्यमिता विकास योजना: <a href="https://nabard.org" target="_blank">https://nabard.org</a></li>
<li>राजस्थान पशुपालन विभाग: <a href="https://animalhusbandry.rajasthan.gov.in" target="_blank">https://animalhusbandry.rajasthan.gov.in</a></li>
</ul>
<p><strong>ऑफलाइन आवेदन:</strong> नज़दीकी पशु चिकित्सालय, पंचायत समिति या जिला पशुपालन कार्यालय से फॉर्म प्राप्त करें।</p>
<h2>निष्कर्ष</h2>
<p>पशुपालन क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएँ पशुपालकों की आय को स्थायी रूप से बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं। इन योजनाओं से न केवल पशु स्वास्थ्य में सुधार होता है बल्कि रोजगार, स्वरोजगार और ग्राम-स्तरीय विकास को भी प्रोत्साहन मिलता है। यदि पशुपालक नियमित टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान और बीमा जैसी सेवाओं का लाभ समय पर लें तो उनकी आय और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सकती हैं।</p>
<p><strong>महत्वपूर्ण सुझाव:</strong> अपनी पंचायत या जिला पशुपालन कार्यालय से संपर्क बनाए रखें, ताकि किसी नई योजना या सहायता की जानकारी समय पर मिल सके।</p>
<p><em>लेख स्रोत:</em> केंद्र व राज्य पशुपालन विभाग की आधिकारिक वेबसाइटों व हालिया प्रेस रिलीज़ पर आधारित।</p>