<p><strong>सारांश:</strong> इस विस्तृत लेख में हम पशुओं में होने वाली एक अनोखी और कम ज्ञात तंत्रिकात्मक बीमारी – ट्राइजेमिनल‑मीडिएटेड हैडशेकिंग – का विस्तार से परिचय देते हैं। इसमें सिर झटकने के सामान्य कारणों से इस बीमारी को अलग करके इसके प्रमुख लक्षण, संभावित कारण, निदान, अनुसंधान, उपचार और प्रबंधन के उपायों को सरल हिंदी में समझाया गया है। लेख पशुपालकों और पशु‑प्रेमियों को आगाह करता है कि सिर झटकने की यह आदत केवल कीट‑संक्रमण या कान की समस्या नहीं हो सकती, बल्कि एक गहरी तंत्रिकात्मक विकार भी हो सकती है। समय पर पशु चिकित्सक से परामर्श करना और सही प्रबंधन अपनाना पशु की जीवन गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण है।</p>

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<h2>1. प्रस्तावना: सिर झटकने के संभावित कारण</h2>

<p>पशुपालक अक्सर देखते हैं कि गाय, भैंस या घोड़ा कभी‑कभी सिर को झटका देते हैं। सबसे सामान्य कारण होते हैं – कान में मच्छर या मक्खी घुस जाना, कान में माइट्स (जूं/किलनी) का संक्रमण, कान में घाव, दाँत या मुंह की समस्याएँ, या साधारण जलन। इन सभी स्थितियों में पशु कुछ देर तक सिर या कान को झटका देता है और जब समस्या दूर हो जाती है तो व्यवहार सामान्य हो जाता है।</p>

<p>लेकिन कुछ मामलों में पशु बिना किसी स्पष्ट बाहरी कारण के बार‑बार, दिन भर या मौसम के अनुसार सिर जोर‑जोर से हिलाता है। वह अपनी नाक को दीवार या जमीन से रगड़ता है, बार‑बार छींकता है या आगे के पैरों से अपने चेहरे को मारने की कोशिश करता है। ऐसे जानवर अक्सर बेचैन, तनावग्रस्त और कभी‑कभी आक्रामक दिखते हैं। यही स्थिति <strong>ट्राइजेमिनल‑मीडिएटेड हैडशेकिंग</strong> हो सकती है।</p>

<h2>2. ट्राइजेमिनल नस का परिचय: शरीर का केबल नेटवर्क</h2>

<p>ट्राइजेमिनल नस हमारे और पशुओं के चेहरे की सबसे बड़ी संवेदन नर्व होती है। यह मस्तिष्क के आधार से निकलती है और तीन मुख्य शाखाओं में विभाजित होती है – ओफ्थाल्मिक (आँख के आसपास), मैक्सिलरी (ऊपरी जबड़े, नाक और गालों में) और मैनडिब्युलर (नीचे के जबड़े और कान में)। यह नस त्वचा, मांसपेशियों, दांतों, साइनस, कान और मुँह की संवेदनाएँ मस्तिष्क तक ले जाती है।</p>

<p>नस की यही विशेषता इसे इतनी महत्वपूर्ण बनाती है कि जब इसमें हल्का भी रोग या संक्रमण हो जाये तो चेहरा, कान और सिर में तीव्र दर्द, जलन या झनझनाहट महसूस होती है। मनुष्यों में भी इस नस की बीमारी को “टिक डौलोरो” या ट्राइजेमिनल न्यूरेल्जिया कहते हैं, जिसमें हल्की हवा या हल्का स्पर्श भी चाकू जैसे दर्द का कारण बन जाता है। इसी तरह, पशुओं में ट्राइजेमिनल नस की अतिसंवेदनशीलता से सिर झटकने का सिंड्रोम विकसित होता है।</p>

<h2>3. यह बीमारी कैसे विकसित होती है? संभावित कारण</h2>

<p>ट्राइजेमिनल‑मीडिएटेड हैडशेकिंग की सही वजह अब तक शोध का विषय बनी हुई है। वैज्ञानिकों ने इसे “सेंसोरी नर्व हाइपरएक्साइटेबिलिटी” यानी तंत्रिका की अति‑संवेदनशीलता माना है। वर्तमान समझ के अनुसार, मस्तिष्क से आने वाले नियंत्रण संकेतों में परिवर्तन, नस के आस-पास सूजन या नस में न्यूरोकेमिकल बदलाव इस अतिसंवेदनशीलता को बढ़ा देते हैं। यह भी संभव है कि नस के अंदर की मायलीन (इंसुलेशन) क्षतिग्रस्त हो रही हो, जिससे न्यूरोन आसानी से उत्तेजित हो जाते हैं।</p>

<p>कुछ संभावित कारक जिनकी चर्चा अनुसंधानों में हुई है:</p>

<ul>

<li><strong>दैनिक और मौसमी प्रभाव:</strong> बहुत से पशु मालिक बताते हैं कि समस्या गर्मियों में अधिक होती है और सर्दियों में कम। धूप और तेज़ हवा से निकलने वाला पराबैंगनी (UV) प्रकाश, परागकण या धूल भी ट्रिगर हो सकते हैं।</li>

<li><strong>हार्मोनल बदलाव:</strong> घोड़ों में यह देखा गया है कि यह बीमारी कुछ हद तक नर घोड़ों (गेल्डिंग्स) में अधिक पाई जाती है और हार्मोन के स्तर में बदलाव इसे प्रभावित कर सकते हैं।</li>

<li><strong>पूर्व संक्रमण या एलर्जी:</strong> कुछ शोधों में पाया गया कि हर्पीज़ वायरस या अस्थमा जैसी एलर्जी वाले पशुओं में नस की संवेदनशीलता बढ़ सकती है।</li>

<li><strong>दर्द मार्ग का पुनर्गठन:</strong> किसी पुराने कान, दाँत या चेहरे के दर्द से तंत्रिका मार्ग इतने समय तक सक्रिय रह सकते हैं कि शरीर की “दर्द स्मृति” बढ़ जाती है और अब छोटे‑छोटे उत्तेजनाओं पर भी बड़ा दर्द महसूस होता है।</li>

</ul>

<h2>4. लक्षणों का व्यापक वर्णन</h2>

<p>यदि आप किसी पशु में ट्राइजेमिनल‑मीडिएटेड हैडशेकिंग का संदेह कर रहे हैं तो निम्नलिखित लक्षणों पर ध्यान दें। सभी लक्षण हर पशु में नहीं दिखेंगे, पर प्रमुख संकेत इस प्रकार हैं:</p>

<ul>

<li><strong>सिर का नियमित, आवर्तक झटकना:</strong> यह झटका आमतौर पर ऊर्ध्वाधर (ऊपर‑नीचे) दिशा में तेज़ और झटकेदार होता है, पर कुछ जानवरों में यह आगे‑पीछे या दाएँ‑बाएँ भी हो सकता है।</li>

<li><strong>नाक और चेहरे में जलन:</strong> पशु अचानक नाक को जमीन या अपने पैरों से रगड़ता है, नाक फुलाता है, बार‑बार छींकता है या होंठ सिकोड़ता है, जैसे अंदर कुछ काट रहा हो।</li>

<li><strong>आंखों और कानों पर असर:</strong> कुछ जानवर आँखों को बंद‑खोलते या कान पटकते हैं। यदि नस की ‘ओफ्थाल्मिक’ शाखा प्रभावित है तो उन्हें प्रकाश से संवेदनशीलता (फोटिक हैडशेकिंग) हो सकती है।</li>

<li><strong>व्यायाम व तनाव से लक्षणों में वृद्धि:</strong> दौड़ते समय, धूप में या तेज़ हवा में काम करते समय लक्षण बढ़ जाते हैं। कुछ पशुओं में भोजन करते समय भी झटका तेज़ हो जाता है, शायद इस दौरान रक्त प्रवाह बढ़ने से नस उत्तेजित होती है।</li>

<li><strong>मानसिक असंतुलन:</strong> लगातार दर्द के कारण पशु चिड़चिड़ा हो सकता है, स्वभाव में परिवर्तन, आक्रामकता या उदासी दिख सकती है।</li>

</ul>

<p>लक्षणों की गंभीरता हल्की से अत्यधिक हो सकती है। हल्के मामलों में सिर कभी‑कभी झटकता है और पशु अन्य कार्य सामान्य रूप से कर लेता है, जबकि गंभीर मामलों में पशु इतना बेचैन रहता है कि घास खाने या दूध पिलाने में भी रुकावट आती है।</p>

<h2>5. अन्य बीमारियों से अंतर</h2>

<p>क्योंकि सिर झटकने के कई सामान्य कारण होते हैं, इसलिए सही निदान करने से पहले अन्य बीमारियों को बाहर करना जरूरी है। पशु चिकित्सक निम्नलिखित समस्याओं को जांचेंगे:</p>

<ul>

<li><strong>कान में परजीवी या टिक:</strong> Otobius megnini जैसे स्पिनोज़ इयर टिक कान की नली में चिपक कर सूजन और सिर झटकना पैदा करते हैं। इसे आसानी से रोशनी में देखने या स्वाब लेकर जांचने पर पता लगाया जा सकता है।</li>

<li><strong>कान की सूजन (ओटाइटिस):</strong> बैक्टीरिया (उदा. Mycoplasma bovis) या फंगल संक्रमण से कान के अंदर सूजन, दर्द, मवाद और सिर का झुकना होता है। ऐसे मामलों में कान से बदबू, मवाद या कान लटकना दिखता है।</li>

<li><strong>दाँत या मुंह की समस्या:</strong> टूटे दांत, दाढ़ में संक्रमण, मुंह के अल्सर या कांटे के कारण भी पशु सिर हिलाता है और नाक रगड़ता है।</li>

<li><strong>साइनसाइटिस या नाक के कीड़े:</strong> कुछ भेड़‑बकरियों में नाक के अंदर botfly larvae (Oestrus ovis) के कारण सिर झटकना और नाक रगड़ना देखा जाता है।</li>

<li><strong>तंत्रिकात्मक/चयापचयी रोग:</strong> हाइपोकैल्सीमिया (मिल्क फीवर), लिस्टीरियोसिस, लीड विषाक्तता या मस्तिष्क में सूजन जैसी बीमारियों में भी सिर के हिलने‑डुलने, मांसपेशी कंपकंपी या सिर के झुकने के लक्षण हो सकते हैं।</li>

</ul>

<p>एक अनुभवी पशु चिकित्सक इन सभी संभावनाओं को क्रमशः देख कर ही ट्राइजेमिनल‑मीडिएटेड हैडशेकिंग का निदान करेगा।</p>

<h2>6. रोग की पुष्टि में प्रयोग होने वाले परीक्षण</h2>

<p>चूँकि इस विकार का कोई विशिष्ट लैब परीक्षण नहीं है, इसलिए इसे एक्सक्लूज़न डायग्नोसिस कहते हैं। फिर भी डॉक्टर कुछ जांचों से मदद लेते हैं:</p>

<ol>

<li><strong>पूरा शारीरिक व न्यूरोलॉजिकल परीक्षण:</strong> पशु का सामान्य व्यवहार, संतुलन, दृष्टि, सुनने की क्षमता और चेहरे की प्रतिक्रियाएँ देखी जाती हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि समस्या केवल सिर झटकने तक सीमित है या अन्य तंत्रिकाओं पर भी प्रभाव है।</li>

<li><strong>कान का ओटोस्कोपिक परीक्षण:</strong> विशेष उपकरण से कान के अंदर की नली, कान का पर्दा और ऊतक देखे जाते हैं। सूजन, परजीवी या मवाद की स्थिति का पता चलता है।</li>

<li><strong>रक्त और सीरम परीक्षण:</strong> कैल्शियम, मैग्नीशियम, हार्मोन के स्तर, लिवर व किडनी की कार्यक्षमता आदि की जांच होती है ताकि चयापचयी रोगों को बाहर किया जा सके।</li>

<li><strong>इमेजिंग (CT/MRI):</strong> गंभीर या अस्पष्ट मामलों में सिर की CT या MRI से चोट, ट्यूमर, साइनसाइटिस या अन्य संरचनात्मक समस्याओं को खोजा जाता है। यह परीक्षण महंगा हो सकता है लेकिन नसों, दांतों और हड्डियों की गहरी जानकारी देता है।</li>

<li><strong>नस के ब्लॉक परीक्षण (nerve block):</strong> कुछ विशेषज्ञ एक स्थानीय एनेस्थेटिक (लिडोकेन आदि) से ट्राइजेमिनल नस की विशिष्ट शाखा को अस्थायी रूप से निष्क्रिय कर देते हैं। अगर इसके बाद सिर झटकना बंद हो जाता है तो पुष्टि होती है कि समस्या उसी शाखा से संबंधित है।</li>

</ol>

<h2>7. उपचार के विकल्प</h2>

<p>दुख की बात है कि वर्तमान में ट्राइजेमिनल‑मीडिएटेड हैडशेकिंग का कोई पूर्ण या स्थायी इलाज नहीं है। लेकिन विभिन्न उपचार और प्रबंधन रणनीतियाँ मिलाकर कई पशुओं में लक्षणों को नियंत्रित या कम किया जा सकता है।</p>

<h3>7.1 पर्यावरणीय व व्यावहारिक उपाय</h3>

<ul>

<li><strong>सुरक्षा नेट या फेस मास्क:</strong> घोड़ों और गायों के लिए नाक और चेहरे को ढकने वाली जाली (nose net) और UV‑प्रोटेक्टिव मास्क उपलब्ध हैं। ये हवा, धूल, कीटों और तेज़ धूप से कुछ हद तक सुरक्षा देकर नस की उत्तेजना कम कर सकते हैं। कई पशुपालकों ने बताया है कि जाली पहनाने से उनके घोड़ों के हेडशेकिंग एपिसोड 50–70 % तक कम हो गए।</li>

<li><strong>नियमित समय पर chारा व व्यायाम:</strong> कुछ जानवरों में खाली पेट रहने या अचानक जोरदार व्यायाम से लक्षण बढ़ जाते हैं। इसलिए संतुलित आहार और धीरे‑धीरे बढ़ने वाला व्यायाम कार्यक्रम उपयोगी है।</li>

<li><strong>वातावरण को शांत रखना:</strong> तेज़ हवा, तेज़ रोशनी और परागकण वाले समय में पशु को छायादार, शांत जगह पर रखना लक्षणों को कम कर सकता है।</li>

</ul>

<h3>7.2 पोषण सम्बन्धी उपाय</h3>

<p>कुछ शोधों में पाया गया कि आहार में मैग्नीशियम और बोरॉन की थोड़ी अधिक मात्रा नस की उत्तेजना में कमी लाती है। इसके पीछे कारण है कि मैग्नीशियम नर्वस सिस्टम को शांत करता है और बोरॉन कैल्शियम‑मैग्नीशियम संतुलन को बेहतर बनाता है।</p>

<p>हालांकि, अत्यधिक खनिजों से विषाक्तता भी हो सकती है, इसलिए इसे पशु चिकित्सक या पशु पोषण विशेषज्ञ की सलाह के बिना प्रयोग न करें। आहार में अल्फाल्फा, उच्च गुणवत्ता वाली घास और कम अनाज (जो pH घटाते हैं) शामिल करना उपयोगी हो सकता है।</p>

<h3>7.3 औषधीय उपचार</h3>

<p>कई दवाइयाँ इंसानों के नसदर्द और मिर्गी के लिए बनाई जाती हैं, जिन्हें पशुओं में हैडशेकिंग के लिए उपयोग किया गया है।</p>

<ul>

<li><strong>गैबापेंटिन और प्रेगाबालिन:</strong> ये दवाइयाँ नस की हाइपरएक्साइटेबिलिटी को कम कर दर्द में राहत देती हैं। कुछ घोड़ों में दिन में दो बार गाबापेंटिन देकर काफी सुधार देखा गया, परंतु कुछ में असर नहीं हुआ।</li>

<li><strong>कार्बामैज़ेपीन और ओक्सकारबाज़ेपीन:</strong> ये एंटी‑कन्वल्सेंट दवाइयाँ हैं जो नस की firing को नियंत्रित करती हैं। इनके साइड इफेक्ट्स जैसे नींद, लिवर एंजाइम बढ़ना आदि हो सकते हैं, इसलिए इन्हें केवल डॉक्टर की निगरानी में देना चाहिए।</li>

<li><strong>सिर्ट्रलिन और साइप्रोहेप्टाडीन:</strong> ये एंटी‑हिस्टामिन और ऐंटी‑सेरोटोनिन दवाइयाँ हैं। कुछ अध्ययनों में इनसे लक्षणों में थोड़ा सुधार पाया गया क्योंकि वे एलर्जी और न्यूरोट्रांसमीटर असंतुलन को नियंत्रित करती हैं।</li>

<li><strong>ट्राइक्लोर्फोन:</strong> कुछ पुराने केस रिपोर्ट में इस कीटनाशक का उपयोग किया गया, पर इसके विषाक्त प्रभाव के कारण अब इसे प्रायः इस्तेमाल नहीं किया जाता।</li>

</ul>

<p>दवा का चयन, मात्रा और अवधि पशु के वजन, लक्षणों की गंभीरता और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों पर निर्भर है। कई बार दो या तीन दवाइयों का संयोजन ही राहत देता है। हर दवा शुरू करने से पहले पशु चिकित्सक से रक्त परीक्षण और संभावित साइड इफेक्ट की चर्चा आवश्यक है।</p>

<h3>7.4 सर्जिकल और न्यूरोमोड्यूलेशन उपचार</h3>

<p>बहुत गंभीर और अन्य सभी उपायों से राहत न मिलने पर कुछ पशुपालकों ने सर्जिकल या न्यूरोमोड्यूलेशन उपचार का विकल्प चुना है।</p>

<ul>

<li><strong>इन्फ्राऑर्बिटल नर्व ब्लॉक और नेरेक्टोमी:</strong> पुराने जमाने में घोड़ों में ऊपरी जबड़े की नस (infraorbital nerve) को सर्जरी से काट दिया जाता था, जिससे नस के दर्द संकेत रुक जाते थे। हालांकि, इसके गंभीर दुष्प्रभाव हैं जैसे चेहरे की सुन्नता, मांसपेशी नियंत्रण में कमी, इसलिए यह आजकल लगभग नहीं किया जाता।</li>

<li><strong>पेरिफेरल नर्व स्टिमुलेशन (PNS):</strong> यह नई तकनीक है जिसमें नस के पास एक छोटा इलेक्ट्रोड लगाया जाता है जो नियमित हल्की विद्युत तरंगें भेजकर नस के दर्द संकेतों को बाधित करता है। कुछ इंसानी मरीजों में यह तकनीक सफल रही है, पर पशुओं में अभी शोध चल रहा है।</li>

</ul>

<h2>8. अनुसंधान की मौजूदा स्थिति</h2>

<p>पिछले दो दशकों में ट्राइजेमिनल‑मीडिएटेड हैडशेकिंग पर काफी अनुसंधान हुआ है, खासकर घोड़ों पर। अमेरिकी और यूरोपीय विश्वविद्यालयों ने नस की संवेदनशीलता को मापने, दर्द की तीव्रता का आकलन करने और नई दवाओं को परखने के लिए अध्ययन किये हैं।\n\nयूसी‑डेविस के वैज्ञानिकों ने दिखाया कि कुछ घोड़ों में ट्राइजेमिनल नस की firing threshold सामान्य घोड़ों की तुलना में दस गुना कम होती है:contentReference[oaicite:0]{index=0}। इसका मतलब है कि हल्की हवा या हल्का स्पर्श भी तेज़ दर्द पैदा करता है। वे यह भी बता रहे हैं कि लगभग 60 % मामलों में लक्षण गर्मियों में अधिक और सर्दियों में कम होते हैं:contentReference[oaicite:1]{index=1}।\n\nनस की अतिसंवेदनशीलता क्यों होती है, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है। कुछ अध्ययन वायरल संक्रमण, ऑटोइम्यून प्रतिक्रियाएँ, हार्मोनल असंतुलन, माइग्रेन जैसी स्थितियाँ और अनुवांशिक प्रवृत्ति पर ध्यान दे रहे हैं। आने वाले सालों में उम्मीद है कि नई शोध हमें बेहतर निदान और उपचार प्रदान करेगी।</p>

<h2>9. एक काल्पनिक केस अध्ययन</h2>

<p>गौरव राजस्थान के एक पशुपालक हैं जिनके पास 15 भैंसें हैं। पिछले वर्ष जुलाई में उन्होंने देखा कि उनकी एक पाँच वर्षीय भैंस, जो रोज़ 10 लीटर दूध देती थी, अचानक अपना सिर जोर‑जोर से झटकने लगी। वह न केवल दूध देते समय बल्कि आराम के दौरान भी बार‑बार सिर ऊपर‑नीचे करती, नाक रगड़ती और कई बार अचानक पगुराना रोक देती। गौरव ने सोचा कि शायद कान में कुछ चला गया है। उन्होंने मवेशी के कान साफ़ किये लेकिन समस्या जस की तस रही।\n\nतब उन्होंने नज़दीकी पशु चिकित्सक को बुलाया। डॉक्टर ने कान का भीतर से परीक्षण किया, पर वहाँ कोई माइट्स या मवाद नहीं दिखा। खून की जांच में कैल्शियम व मैग्नीशियम स्तर सामान्य निकले। CT स्कैन करवाने पर भी कोई साइनसाइटिस या ट्यूमर नहीं मिला। अंत में डॉक्टर ने ट्राइजेमिनल नस के इंफ्राऑर्बिटल शाखा को लोकल एनेस्थेटिक से ब्लॉक किया। हैरानी की बात यह हुई कि इंजेक्शन लगने के बाद कुछ घंटों तक भैंस ने सिर नहीं झटका। यह सिंड्रोम की पुष्टि थी।\n\nचूँकि कोई स्थायी इलाज नहीं था, डॉक्टर ने गौरव को कुछ प्रबंधन सलाह दी – जैसे दिन में दो बार गाबापेंटिन देना, धूप में न ले जाना, नाक पर जाली का उपयोग और अल्फाल्फा के साथ संतुलित आहार। प्रारंभिक कुछ हफ्तों में लक्षणों में बहुत अंतर नहीं दिखा, पर धीरे‑धीरे सिर झटकना कम हुआ और तीन महीने बाद भैंस लगभग सामान्य हो गयी। कभी‑कभी गर्म दिन में हल्का झटका आता, पर अब वह सामान्य दूध दे रही है।\n\nयह केस बताता है कि सही निदान, धैर्य और विभिन्न उपायों के संयोजन से पशुओं को राहत मिल सकती है।</p>

<h2>10. पशुपालकों के लिए सुझाव</h2>

<p>• <strong>धैर्य रखें:</strong> यह समस्या अचानक ठीक नहीं होती। दवाइयाँ और प्रबंधन का असर धीरे‑धीरे दिखता है।<br />\n• <strong>तुरन्त पशु चिकित्सक से सलाह लें:</strong> सिर झटकने को नजरअंदाज न करें। कान, दाँत या अन्य संक्रमण की संभावना पहले दूर कराएँ।<br />\n• <strong>मल्टिपल अप्रोच अपनाएँ:</strong> पोषण, पर्यावरण, दवा और व्यवहार में परिवर्तन–सभी का संयोजन बेहतर परिणाम देता है।<br />\n• <strong>रोज़ाना का रिकॉर्ड रखें:</strong> कब और किन परिस्थितियों में सिर झटकना बढ़ता है, यह नोट करें। यह डॉक्टर को ट्रिगर पहचानने में मदद करेगा।<br />\n• <strong>पशु के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें:</strong> लंबे समय से चल रहे दर्द से पशु अवसाद या आक्रामकता का शिकार हो सकता है। प्यार, देखभाल और शांत माहौल उसे राहत देता है।</p>

<h2>11. निष्कर्ष</h2>

<p>ट्राइजेमिनल‑मीडिएटेड हैडशेकिंग एक जटिल और चुनौतीपूर्ण रोग है जो न केवल पशु बल्कि मालिकों के लिए भी चिंता का कारण बनता है। इसके कारणों और इलाज पर शोध जारी है, परंतु हम पहले से ही जानते हैं कि इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर निदान, अन्य संभावित कारणों को दूर करना, और व्यापक प्रबंधन रणनीतियों से अधिकांश जानवरों के लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सही जानकारी साझा करने से पशुपालकों की मदद होगी और पशुओं को दर्द से राहत मिलेगी।</p>