<p>सर्दियों का मौसम पशुओं के लिए आरामदायक माना जाता है, लेकिन यही समय <strong>खुरपका-मुंहपका (Foot and Mouth Disease – FMD)</strong> के फैलने का भी सबसे अनुकूल समय होता है। यह बीमारी <strong>गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर</strong> में बहुत तेजी से फैलती है और दूध उत्पादन व पशु-स्वास्थ्य पर बड़ा असर डालती है।</p>
<h2>FMD क्या है?</h2>
<p>FMD एक <strong>अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी</strong> है। यह रोग हवा, सीधे संपर्क, दूषित चारा-पानी, जूते-कपड़े, वाहन और पशु-आवागमन के जरिए तेजी से फैल सकता है।</p>
<h2>सर्दियों में FMD ज्यादा क्यों फैलती है?</h2>
<p>सर्दियों में कई कारण मिलकर FMD का जोखिम बढ़ा देते हैं:</p>
<p><strong>1)</strong> पशुओं का झुंड में अधिक समय रहना<br>
<strong>2)</strong> ठंड/कोहरे के कारण कम धूप और अधिक नमी<br>
<strong>3)</strong> पशुशाला में वेंटिलेशन की कमी<br>
<strong>4)</strong> प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) का कमजोर होना<br>
<strong>5)</strong> मेलों/हाटों में पशुओं की आवाजाही बढ़ना</p>
<h2>मुख्य लक्षण (Symptoms)</h2>
<p>FMD के सामान्य लक्षण ये हो सकते हैं:</p>
<p><strong>•</strong> बुखार<br>
<strong>•</strong> मुँह, जीभ और मसूड़ों पर छाले/घाव<br>
<strong>•</strong> बहुत अधिक लार टपकना<br>
<strong>•</strong> चारा खाना कम/बंद हो जाना<br>
<strong>•</strong> खुरों के बीच घाव, दर्द और लंगड़ापन<br>
<strong>•</strong> दूध उत्पादन में अचानक गिरावट</p>
<p><em>ध्यान दें:</em> छोटे बछड़ों में यह बीमारी ज्यादा गंभीर हो सकती है, इसलिए लक्षण दिखते ही तुरंत ध्यान दें।</p>
<h2>इलाज बनाम बचाव</h2>
<p>FMD का कोई “एक” सीधा इलाज नहीं है, लेकिन सही देखभाल से पशु जल्दी संभल सकता है। असली सुरक्षा <strong>समय पर टीकाकरण</strong> से मिलती है।</p>
<h2>टीकाकरण (FMD Vaccine) – सबसे जरूरी कदम</h2>
<p><strong>•</strong> FMD वैक्सीन <strong>हर 6 महीने</strong> में लगवाना बेहतर माना जाता है (स्थानीय पशु चिकित्सक की सलाह अनुसार)।<br>
<strong>•</strong> झुंड के <strong>सभी स्वस्थ पशुओं</strong> को एक साथ टीका लगवाएँ।<br>
<strong>•</strong> टीकाकरण के बाद 10–15 दिन तक पशुओं को अनावश्यक तनाव, लंबी दूरी यात्रा और बाजार/हाट से दूर रखें।</p>
<h2>घर पर क्या सावधानियाँ रखें?</h2>
<p><strong>1)</strong> बीमार पशु को तुरंत अलग करें (Isolation)।<br>
<strong>2)</strong> पशुशाला को सूखा, साफ और हवादार रखें।<br>
<strong>3)</strong> फर्श/रास्तों पर कीटाणुनाशक (जैसे फिनाइल) या चूना का उपयोग करें।<br>
<strong>4)</strong> मुँह के घावों के लिए पशु चिकित्सक की सलाह से उचित दवा/लेप करें।<br>
<strong>5)</strong> खुरों को साफ रखें; जरूरत हो तो गुनगुने पानी से सफाई कराएँ।<br>
<strong>6)</strong> नरम और पौष्टिक आहार दें; साफ पानी हमेशा उपलब्ध रखें।</p>
<h2>Pashupalan की सलाह</h2>
<p>खुरपका-मुंहपका एक ऐसी बीमारी है जो पशु के साथ-साथ पशुपालक की कमाई को भी प्रभावित करती है। इसलिए तीन बातें याद रखें:</p>
<p><strong>• समय पर टीकाकरण</strong><br>
<strong>• साफ-सफाई</strong><br>
<strong>• जल्दी पहचान और तुरंत सलाह</strong></p>
<p><strong>डिस्क्लेमर:</strong> यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। कृपया अपने क्षेत्र के पशु चिकित्सक/पशु चिकित्सालय से सलाह लेकर ही उपचार/टीकाकरण कराएँ।</p>