<p>हर साल सर्दी शुरू होते ही हजारों पशुपालक परेशान हो जाते हैं कि उनकी भैंस जो कल तक 10–12 लीटर दूध दे रही थी, वह अचानक 6–7 लीटर पर क्यों आ गई।

यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की <strong>अंदरूनी जैविक प्रतिक्रिया (Physiological Stress)</strong> है।</p>


<p>भैंस का शरीर ठंड में सबसे पहले अपने <strong>जीवित रहने (Survival)</strong> को प्राथमिकता देता है, दूध को नहीं।

इसलिए शरीर दूध बनाने की ऊर्जा को शरीर को गर्म रखने में लगा देता है।</p>


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<h2>कारण 1 – ठंड में रूमेन स्लो हो जाना</h2>


<p>भैंस के पेट का पहला भाग (Rumen) ठंड में सुस्त हो जाता है।

इससे चारा सही तरीके से नहीं पचता, ऊर्जा कम बनती है और दूध घटता है।</p>


<p><strong>पहचान:</strong>

भैंस सुस्त, जुगाली कम, गोबर कड़ा, पेट थोड़ा बैठा हुआ।</p>


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<h2>कारण 2 – ठंडा पानी पीने से मेटाबोलिज्म गिरना</h2>


<p>सर्दियों में भैंस बहुत ठंडा पानी पीती है, जिससे उसका शरीर अंदर से ठंडा हो जाता है।

शरीर अपनी सारी ऊर्जा खुद को गर्म रखने में लगा देता है — दूध बनना रुक जाता है।</p>


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<h2>कारण 3 – मिनरल की गुप्त कमी</h2>


<p>भैंस दिखने में ठीक होती है लेकिन अंदर से जिंक, कॉपर, कोबाल्ट और फॉस्फोरस की भारी कमी हो जाती है।

यह सीधे दूध पर असर डालती है।</p>


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<h2>कारण 4 – हॉर्मोनल असंतुलन</h2>


<p>ठंड में मेलाटोनिन और कोर्टिसोल बढ़ जाते हैं, जिससे दूध बनाने वाला प्रोलैक्टिन दब जाता है।

यही कारण है कि दूध अचानक गिर जाता है।</p>


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<h2>कारण 5 – एनर्जी की कमी</h2>


<p>सर्दियों में शरीर को गर्म रखने में 20–25% ज्यादा ऊर्जा लगती है।

अगर अतिरिक्त ऊर्जा नहीं दी गई, तो दूध घटेगा ही।</p>


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<h2>कारण 6 – सबक्लिनिकल मैस्टाइटिस</h2>


<p>ठंड में थन की नसें सिकुड़ जाती हैं, बैक्टीरिया अंदर प्रवेश कर लेते हैं और दूध धीरे-धीरे कम होता जाता है।</p>


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<h2>7 दिन का दुग्ध-रिकवरी प्रोटोकॉल</h2>


<h3>दिन 1–3</h3>

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• गुनगुना पानी पिलाएं

• सुबह-शाम 100 ग्राम गुड़ + 20 ग्राम सरसों तेल

• 50 ग्राम मिनरल मिक्स

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<h3>दिन 4–7</h3>

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• खली 1 किलो

• चोकर 1 किलो

• हरा चारा + सूखा चारा बराबर

• सप्ताह में 2 बार यीस्ट प्रॉबायोटिक

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<h2>कब डॉक्टर बुलाएं?</h2>

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• 7 दिन में सुधार नहीं

• थन गरम/सख्त

• दूध में पानी या गांठ

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<h2>निष्कर्ष</h2>

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अगर समय रहते पोषण और देखभाल सुधार ली जाए तो सर्दियों में भी भैंस का दूध वापस पहले जैसा लाया जा सकता है।

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