गायों और भैंसों में एसाइटिस (पेट में फ्लूइड जमा होना): कारण, डिफरेंशियल डायग्नोसिस, और ड्रेनेज | पशुपालन
गाय-भैंस में Ascites (पेट में पानी) क्यों होता है? गैस, गर्भ और अन्य रोगों से पहचान (Differential Diagnosis) कैसे करें? कब drainage करना चाहिए और कब नहीं?
पशुपालक की भाषा में: “पेट में पानी भर जाना” (Ascites) खुद बीमारी नहीं, बल्कि अंदरूनी गंभीर समस्या का संकेत है। इस लेख में हम कारण, लक्षण, अलग-अलग बीमारियों से पहचान (Differential Diagnosis), कब/कैसे drainage करें और उपचार-प्रबंधन को सरल हिंदी में समझेंगे।
Ascites (पेट में पानी) क्या है?
Ascites का मतलब है पशु के पेट (Abdomen) की गुहा में तरल (Fluid) का असामान्य रूप से जमा हो जाना। सामान्य स्थिति में पेट के भीतर बहुत कम तरल होता है, पर जब यह मात्रा बढ़ जाती है तो पेट बाहर से फूला हुआ दिखता है। पशुपालक इसे “पेट में पानी” कहते हैं।
ध्यान रखें: Ascites एक लक्षण है — यानी किसी लिवर, हृदय, प्रोटीन कमी, परजीवी या लंबी बीमारी जैसी मूल समस्या की ओर संकेत करता है।
Ascites क्यों होता है? (सरल कारण-समझ)
पशु चिकित्सकीय दृष्टि से Ascites बनने के मुख्य रास्ते ये हैं:
- लिवर की कमजोरी/सिरोसिस (Liver disease): लिवर में खून का दबाव बढ़ने (Portal Hypertension) से तरल पेट में रिसने लगता है।
- खून में प्रोटीन/Albumin की कमी (Hypoproteinemia): Albumin कम होने पर तरल नसों से बाहर निकलकर पेट में जमा होने लगता है।
- दिल की कमजोरी (Right-sided Heart Failure): नसों में जाम/दबाव बढ़ने से पेट में पानी भर सकता है।
- दीर्घ संक्रमण/सूजन (Chronic infection/inflammation): कुछ मामलों में पेरिटोनाइटिस, TB आदि से भी तरल बढ़ता है।
गाय-भैंस में Ascites के सामान्य कारण (Common Causes)
- Chronic Liver Disease / Cirrhosis
- Right-sided heart failure
- भारी परजीवी संक्रमण (जैसे Liver fluke / Haemonchus आदि)
- कुपोषण/प्रोटीन की कमी
- दीर्घ संक्रमण (कुछ क्षेत्रों में TB/पेरिटोनाइटिस आदि)
- ट्यूमर/गांठ (दुर्लभ पर संभव)
- किडनी/अन्य दीर्घ रोग (कम मामलों में)
पशुपालक क्या लक्षण देखता है? (Signs & Symptoms)
- पेट का धीरे-धीरे बड़ा होना, खासकर नीचे की ओर लटकना
- सांस फूलना (पेट का दबाव फेफड़ों पर)
- चलने-फिरने में कठिनाई, जल्दी थक जाना
- भूख कम होना, जुगाली कम होना
- दूध उत्पादन घटना
- कभी-कभी पैरों/थन में सूजन
फील्ड संकेत: हल्का दबाने पर कई बार “पानी की लहर” (Fluid thrill) जैसा एहसास हो सकता है।
Differential Diagnosis: “पेट फूला है” तो Ascites ही है क्या?
नहीं। पशु चिकित्सक के लिए सबसे जरूरी कदम है यह तय करना कि पेट में पानी है या गैस, गर्भ, गांठ या आंत की समस्या। नीचे आम स्थितियों से अंतर बताया गया है:
1) Ruminal Tympany (गैस / अफारा)
- अफारे में आमतौर पर बायाँ फ्लैंक ज्यादा उभरता है
- थपथपाने पर ड्रम जैसी आवाज आती है
- तुरंत बेचैनी, सांस तेज, दर्द दिखाई दे सकता है
2) Pregnancy (अंतिम गर्भावस्था)
- पेट का उभार अक्सर एक तरफ ज्यादा हो सकता है
- रेक्टल/पैल्पेशन में भ्रूण/गर्भ संकेत मिलते हैं
- Ascites में तरल अधिकतर नीचे-चारों तरफ फैलता है
3) Uterine Dropsy (Hydrometra/Mucometra)
- गर्भाशय में तरल; रेक्टल जांच से पुष्टि
- पेट का फैलाव, पर “फ्लूड” का पैटर्न अलग
4) Intestinal Obstruction (आंत में रुकावट)
- अक्सर तेज दर्द, खाना बंद, मल कम/बंद
- Ascites में दर्द हर बार नहीं होता
5) Peritonitis (पेट की झिल्ली में सूजन/संक्रमण)
- बुखार, तेज दर्द, पेट छूने पर प्रतिक्रिया
- Ascitic fluid धुंधला/बदबूदार हो सकता है
6) Obesity (मोटापा)
- धीरे-धीरे वजन बढ़ना; तरल लहर जैसा एहसास नहीं
- पेट “मुलायम-चर्बीदार” पर fluid जैसा नहीं
Diagnosis: Ascites की पुष्टि कैसे करें? (Vet Point of View)
- क्लिनिकल जांच: पेट का आकार, सांस, नाड़ी, दिल की आवाज, शारीरिक स्थिति
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Diagnostic Abdominocentesis (टैप): थोड़ी मात्रा तरल निकालकर रंग/गंध/गाढ़ापन देखें
- साफ/हल्का पीला → अक्सर Transudate (प्रोटीन कमी/लिवर/हार्ट)
- धुंधला/गाढ़ा/बदबू → संक्रमण/Peritonitis की आशंका
- खूनी → Trauma/Tumor/रक्तस्राव आदि की संभावना
- Blood test (जहाँ संभव): Total protein, Albumin, Liver enzymes
- USG (जहाँ उपलब्ध): तरल की मात्रा और अंगों की स्थिति देखना
Ascites Drainage (Abdominocentesis): कब करें?
Drainage का उद्देश्य तुरंत राहत देना है, इलाज नहीं। इसलिए drainage तभी करें जब:
- पेट इतना भर गया हो कि सांस लेने में दिक्कत हो
- जानवर खड़ा नहीं रह पा रहा या बहुत असहज हो
- दवाओं से तत्काल राहत नहीं मिल रही
- Diagnosis के लिए थोड़ी मात्रा में तरल निकालना जरूरी हो
Drainage कब नहीं करना चाहिए? (Contra-indications)
- शॉक/बहुत कमज़ोरी: Drainage से BP और गिर सकता है
- बहुत कुपोषण/प्रोटीन बहुत कम: बार-बार पानी निकालना नुकसान बढ़ा देता है
- लेट प्रेग्नेंसी: जोखिम बढ़ता है
- पेट की दीवार में संक्रमण/फोड़ा: अंदर संक्रमण फैलने का खतरा
- बहुत कम ascites: लाभ कम, रिस्क ज्यादा
फील्ड-लेवल Drainage: कैसे किया जाता है? (General Guidance)
आमतौर पर Trocar–Cannula या बड़ी सुई/कैथेटर से drainage किया जाता है। जगह का चयन, एंटीसेप्टिक तैयारी और धीरे-धीरे तरल निकालना सबसे जरूरी है।
- जानवर को खड़ा रखें और सुरक्षित रूप से restrain करें
- जगह को shave + antiseptic करें
- धीरे-धीरे पानी निकालें; अचानक बहुत ज्यादा न निकालें
- एक बार में बहुत ज्यादा निकालना (जैसे बहुत बड़े volume) शॉक/कमज़ोरी बढ़ा सकता है
नोट: Practical decision (कितना निकालना है) पशु की उम्र, हालत, सांस की स्थिति और कमजोरी देखकर करें।
Drainage के बाद क्या देखभाल जरूरी है? (After-care)
- Hydration support: जरूरत पर fluids (धीरे)
- Protein support: अच्छा प्रोटीन-आहार; जहां उपलब्ध, vet-supervision में protein therapy
- Mineral mixture और vitamins
- Diuretics (जैसे Furosemide) केवल vet सलाह पर और सावधानी से
- Antibiotics केवल तब जब संक्रमण का शक/सबूत हो
- Salt नियंत्रित रखें (खासकर बार-बार ascites में)
सबसे जरूरी: मूल कारण का इलाज (Cause-based Treatment)
यदि कारण नहीं खोजेंगे तो पानी फिर से भर जाएगा। इसलिए साथ-साथ:
- परजीवी नियंत्रण: रणनीतिक deworming (खासकर liver fluke क्षेत्र में)
- लिवर सपोर्ट: hepatoprotective + बेहतर आहार प्रबंधन
- दिल की समस्या: cardiac evaluation और सपोर्टिव ट्रीटमेंट
- कुपोषण/प्रोटीन कमी: फीड सुधार, दाना, खली, हरा चारा, संतुलित मिनरल
- दीर्घ संक्रमण: जांच और targeted उपचार
Prognosis: क्या पशु ठीक हो सकता है?
- कुपोषण/प्रोटीन कमी से बना Ascites: समय पर सुधार से बेहतर परिणाम
- लिवर सिरोसिस/हार्ट फेल्योर वाले केस: अक्सर दीर्घकालीन और चुनौतीपूर्ण
- बार-बार drainage की जरूरत: poor prognosis का संकेत
पशुपालक के लिए 7 आसान नियम
- “पेट फूला” दिखे तो पहले तय करें: गैस है या पानी।
- बिना डॉक्टर के बार-बार “सुई” लगवाकर पानी न निकलवाएँ।
- सांस फूल रही हो, पशु बैठा रहे—तो इसे इमरजेंसी मानें।
- हरा चारा + दाना + प्रोटीन स्रोत + मिनरल का संतुलन रखें।
- क्षेत्र के अनुसार लिवर फ्लूक का नियंत्रण जरूर करें।
- Drainage के बाद भी इलाज जारी रखें—क्योंकि कारण अभी बाकी है।
- कमजोरी बहुत बढ़े तो डॉक्टर से लिवर/हार्ट की जांच पर बात करें।